रविवार, 19 मार्च 2017

ईश्वर

तन तन में है आत्मा
आत्मा में है परआत्मा
इसलिए मेरे भाई -बहनों
आपको है मेरा प्रणाम प्रणाम प्रणाम

पहचान

मैं लिखाता हूँ दिल की पीडा़
मैं गाता हूँ दिल की व्यथा
मैं हर घर घर की लिखाता हूँ कहानी
मेरे जुबानी पर बस मानव मानव की ही कहानी
ये सिर्फ शब्द नहीं है ये मेरे तन की बेलि है
हर मानव के अस्तित्व की पहचान है
ये मेरी  कहानी बस मेरी नहीं है विश्व के हर मानव की है


अतिथि

जीवन कुछ पलों का शृंगार है
ना आने की तिथि है
ना जाने की तिथि है
बस हम यहाँ एक अतिथि है
खुशी से रहना खुशी से जीना है
मेरे प्यारे यह जीवन कुछ पलों का शृंगार है 

शनिवार, 18 मार्च 2017

मानव

मानव है रे तु मानव 
तेरी पहचान है रे मानव 
तु खुद्द को पहचान ले रे तु है मानव 
अब तेरी नीति है रे दानव जैसी कब बदल गया रे तु 
जिस देश में पैदा हुआ जिस मिट्टी से पला बड़ा हुआ 
उस से गद्दारी मत कर से सभी तेरे भाई है 
खुद्द को बड़ा मत समझ ले सब को एक ही मिट्टी जाना है 
बस मानव बन कर तुझे जीना है बस मानव बन कर तुझे जीना है